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Saravali

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Motilal Banarsidass, 1977 - 568 pages

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१० १२ अ० अधिक अन्य अपने अर्थात् इस एक एवं औम और कथन कन्या करने वाला कर्क कर्ता का ज्ञान का फल की की दृष्टि कुरुते के समान को गुरु गुरू ग्रह ग्रहों चंद्रमा चतुर्थ चन्द्र चन्द्रमा से चाहिये जन्म के समय जो तथा दशम दशा दृष्ट हो तो द्वितीय धन धनी नवम पाप पुत्र पुरुष प्रकार प्रथम प्राप्त बल बली बु० बुध भवति भाव में भी भीम भौम मकर में चन्द्रमा में सूर्य में हो तो यदि कुण्डली में यदि जन्म के यह या युति का फल योग ज्ञान रा राजा होता राशि का राशि में राशि व राशिस्य लान वर्ष वा वाला होता है वृ० वृष शनि शुक शुक्र शुभ सत्रों समस्त सुख सुन्दर से दृष्ट हो से युक्त से युत स्थान स्वामी स्वी ही हैं हो तो जातक हों होता है है होती

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