Darśana-tattva-viveka, Volume 1

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Urmilā Devī Śāstrī, 1973 - Hindu philosophy
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अत अथवा अपने अर्थ आत्मा आदि इन इस प्रकार इसका इसी उत्पन्न उसका उसके ऋग्वेद एक एवं ऐसा कर करता है करते करने कर्म का वर्णन कारण कार्य किया गया है किया है किसी की के के लिए के विषय के साथ केवल को कोई क्योंकि गुण जगत् जब जा जाती जाते जावे जिस जीव जो ज्ञान तत्व तथा तो था दर्शन दिया दो दोनों द्वारा धर्म नहीं है ने न्याय पद पदार्थ पर परमात्मा परमेश्वर पुरुष पूर्व प्रकृति प्रत्यक्ष प्रमाण फिर भी भेद मंत्र मन माना मीमांसा में में भी में यह यजुर्वेद यदि यह यहाँ पर ये योग रूप में वर्णन है वस्तु वह वाला वाले विचार विशेष विषय में वे वेद वेदान्त वैशेषिक शब्द शरीर सकता है समय सम्बन्ध सांख्य सिद्ध से स्वीकार ही हुआ हुये है और है कि है तो है परन्तु है वह है है हैं होता है होती होते होना होने से

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