Dukhi Bharat दुखी भारत Vol. 1: Answer to the "Mother India" of Ms. Katherine Mayo

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Sharda Prakashan, Jul 23, 2021 - Antiques & Collectibles - 229 pages

दुखी भारत भारतीय स्वतंत्रता सेनानी लाला लाजपत राय द्वारा लिखी गई पुस्तक है। भूमिका में ही अपनी रचना प्रविधि तथा प्रतिवाद के लक्ष्य को स्पष्ट करते हुए लाजपत राय ने लिखा है कि-

“इस पुस्तक को संसार में उपस्थित करने के लिए अधिक लिखने की आवश्यकता नहीं है। मैं इसके लिए न मौलिकता का दावा करता हूँ न साहित्यिक विशेषता का। मेरी राय में अन्य लेखों से अपने मतलब की बाते खोजने, उनकी सत्यता की जांच करने और उनको प्रमाण स्वरूप उपस्थित करने की अपेक्षा किसी विषय पर एक मौलिक निबन्ध लिखना अधिक सरल है। पर मेरा सम्बन्ध एक पराधीन जाति से है और मैं, जो मिथ्या और भद्दी बातें घृणित उद्देशों को लेकर रची गई हैं और सारे संसार में फैलाई गई हैं, उनकी असत्यता सिद्ध करने के लिए और उनसे अपनी मातृभूमि को बचाने के लिए यह किताब लिख रहा हूँ, इसलिए मुझे लिखित प्रमाणों का सहारा लेना ही पड़ेगा।”

इस पुस्तक में श्री लाला लाजपत राय ने मेयो के मत-प्रचार को सटीक उत्तर दिया । इस पुस्तक में उन्होने भारतीय सभ्यता की तुलना समकालीन अमरीकी और ब्रिटेनी सभ्यता से की । उन्होंने बताया कि वहाँ भी भारत से अलग कुछ नहीं है । यह पुस्तक 1928 के भारत और वैश्विक समाज को जानने के लिये बहुत लाभकारी है।

 

Selected pages

Contents

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11
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Section 8
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Section 12
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Section 13
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Section 14
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Section 15
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Section 16
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Section 17
206
Section 18
211
Section 19
217

Section 9
109
Section 10
113
Section 11
118
Section 20
220
Copyright

Common terms and phrases

अत्यन्त अधिक अधिकार अपना अपनी अपने अफ्रीका अब अमरीका इन इस इस प्रकार इस बात इसके इसी उनकी उनके उन्हें उस उसका उसकी उसके उसने उसी उसे एक कर करती करते हैं करना करने के लिए कहा का काम कारण किया किया है किसी की कुछ के लिए के सम्बन्ध में के साथ केवल को कोई क्या गई गया है गये चाहिए जब जा जाता है जाति जातियों जाती जीवन जो तक तब तो था थी थे दिया दी दूसरे देने नहीं नहीं है ने पंजाब पति पर परन्तु पहले पुस्तक पृष्ठ प्राचीन प्राप्त बड़ी बहुत ब्रिटिश भारत भारतवर्ष भारतीय भी मदर इंडिया महात्मा गाँधी मिस मेयो में भी मैं यदि यह या रहा रहे रूप रोम लोग लोगों वर्णन वर्ष वह विचार विवाह वे शिक्षा संख्या सकता सकती सकते सब समय सरकार से स्त्रियों स्त्री हम हिन्दू ही हुआ हुई हुए है और है कि हैं हो होने

About the author (2021)

लाला लाजपत राय (जन्म: 28 जनवरी 1865 - मृत्यु: 17 नवम्बर 1928) भारत के एक प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी थे। इन्हें पंजाब केसरी भी कहा जाता है। इन्होंने पंजाब नैशनल बैंक और लक्ष्मी बीमा कम्पनी की स्थापना भी की थी। ये भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में गरम दल के तीन प्रमुख नेताओं लाल-बाल-पाल में से एक थे। सन् 1928 में इन्होंने साइमन कमीशन के विरुद्ध एक प्रदर्शन में हिस्सा लिया, जिसके दौरान हुए लाठी-चार्ज में ये बुरी तरह से घायल हो गये और अन्ततः १७ नवम्बर सन् १९२८ को इनकी महान आत्मा ने पार्थिव देह त्याग दी।

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