The True History and the Religion of India: A Concise Encyclopedia of Authentic Hinduism

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Motilal Banarsidass Publ., 2001 - Hinduism - 800 pages
14 Reviews
ABOUT THE BOOK: The True History and the Religion of India, A concise Encyclopedia of Authentic Hinduism is one of the most comprehensive books on human civilization. It is an authoritative view of the history of world thought. The book provides the
 

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User Review  - yonderboy777 - LibraryThing

I had purchased this on the recommendation of a doubtlessly well-meaning goodreads member, but returned it for a refund. It is a fine example of the poisonous new Hindu nationalism that is preaching Indian supremacy in the name of God. For shame. Read full review

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प्रकाशानंद सरस्वती से कोई संबंध नहीं: कृपालुजी महाराज
जगद्गुरु कृपालुजी महाराज और उनके नेतृत्व में चल रहे संगठनों ने अमेरिका में अपराधी घोषित किए जा चुके स्वामी
प्रकाशानंद सरस्वती से किसी भी तरह का संबंध होने से इंकार किया है।
Updated: October 14, 2012, 6:28 AM IST
नई दिल्ली। जगद्गुरु कृपालुजी महाराज और उनके नेतृत्व में चल रहे संगठनों ने अमेरिका में अपराधी घोषित किए जा चुके स्वामी प्रकाशानंद सरस्वती से किसी भी तरह का संबंध होने से इंकार किया है। यह इंकार कृपालु महाराज के न्यास द्वारा जारी बयान में किया गया है। मीडिया में आई रपटों पर प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए जगद्गुरु कृपालु परिषत-श्यामा श्याम धाम ने कहा है कि कृपालु महाराज शिष्य बनाने की परंपरा के सख्त खिलाफ हैं। "महाराज जी ने कभी शिष्य नहीं बनाए और उन्होंने कभी किसी को गुरुमंत्र नहीं दिए।"
बयान में कहा गया है, "यह गौर करने लायक है कि प्रकाशानंद सरस्वती जगद्गुरु शंकराचार्य ब्रह्मानंद सरस्वती (एक संन्यासी) के शिष्य हैं। जगद्गुरु कृपालु जी महाराज गृहस्थ हैं और वैष्णव हैं।"
बयान में कहा गया है, "यह बयान जगद्गुरु कृपालु जी महाराज के न्यास द्वारा एक समाचार पत्र में प्रकाशित खबर की प्रतिक्रियास्वरूप जारी किया गया है, जिसमें कहा गया है कि अमेरिका में एक मामले में वांछित स्वामी प्रकाशानंद सरस्वती जगद्गुरु कृपालु जी महाराज से जुड़े हुए हैं।"
बयान में कहा गया है, "ऐसी परिस्थितियों में गलत धारणाएं पैदा करना और यह कहकर लोगों को भ्रम में डालना कि कोई वांछित अपराधी उनका शिष्य है या उनके अधीन किसी न्यास की गतिविधियों से जुड़ा है, निश्चितरूप से निंदनीय है।"
स्वामी प्रकाशानंद सरस्वती को अमेरिका में टेक्सास की अदालत ने मार्च 2011 में बच्चों के साथ अश्लील हरकतों के 20 मामलों में सजा सुनाई थी। अदालत ने 80 वर्षीय
 

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Contents

II
51
III
95
IV
223
V
405
VI
511
VII
513
VIII
525
IX
535
X
649
Copyright

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