Vivah Vimarsh Vivah Samay : Sangyan Sutra

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Motilal Banarsidass Publishe, Jan 1, 2008 - 426 pages
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mridula trivedi write very good book it is one of them . she is very good observer and explaine all point very easy and great examples. Her great observation and explainng all points necessary for vivah explain very well here, read book and enjoy classic point you will never found in any book.

Selected pages

Contents

Section 1
3
Section 2
33
Section 3
74
Section 4
205
Section 5
216
Section 6
228
Section 7
237
Section 8
250
Section 12
287
Section 13
315
Section 14
324
Section 15
331
Section 16
333
Section 17
338
Section 18
343
Section 19
404

Section 9
256
Section 10
260
Section 11
285
Section 20
410
Section 21
411
Section 22
422

Common terms and phrases

अंश अति अथवा अधिक अनेक अपने अल इस उत्तरायण उत्पन्न उन उनके उस उसके एक एवं और कन्या करके करता है करते करना चाहिए करने करने के का विवाह कि की के कारण के लिए के समय के साथ केतु को क्रिया गया गोचर का ग्रह चन्द्रमा जन्म जप जब जल जा जाता है जातिका का जी जीवन जो तक तथा तब तो तो विवाह दिन दुध दोनों द्वारा द्वितीय नक्षत्र नवमांश नहीं ने पति पर परन्तु प्रकार प्रण प्राप्त भाव में भी मंगल मंत्र मन मय माय में विवाह में स्थित है यदि यर यह यहीं या योग रहा था रा राशि में राहु रूप वर्ष विचार विलम्ब विवाह के विवाह में विष्णु वृहस्पति वे शनि शनि की शिव शुक सप्तम भाव सप्तमेश सब सम्पन्न सूई से स्थान स्पष्ट ही हुआ हुए हेतु है और हैं हो तो होकर होगा होता है होती होने के

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