Vrat Parva Aur Tyohar

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Diamond Pocket Books (P) Ltd. - 272 pages
 

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Birahspativar ki katha

Selected pages

Contents

Section 1
61
Section 2
69
Section 3
69
Section 4
69
Section 5
69
Section 6
69
Section 7
15
Section 8
32
Section 19
150
Section 20
155
Section 21
155
Section 22
162
Section 23
171
Section 24
190
Section 25
192
Section 26
194

Section 9
58
Section 10
58
Section 11
86
Section 12
93
Section 13
96
Section 14
101
Section 15
105
Section 16
116
Section 17
131
Section 18
133
Section 27
199
Section 28
206
Section 29
216
Section 30
230
Section 31
259
Section 32
259
Section 33
263
Section 34
Section 35

Common terms and phrases

अपनी अपने आदि इस दिन इस व्रत इसके इसी उनका उनके उन्हें उन्होंने उस उसका उसकी उसके उसने उसे एक एकादशी और कथा कर करके करती करते हैं करने करने से करें का कारण कि किया किया जाता है किसी की कुछ कृष्ण पक्ष के बाद के लिए के लिये के साथ को कोई गई गए गया गये घर चाहिये जन्म जब जयन्ती जल जाता है जाती जाने जी जो तक तथा तब तुम तो था थी थे दान दिया दी देखा देवी धर्म नवमी नहीं नाम ने पति पर पर्व पुत्र पूजन पूजा पूर्णिमा प्रकार प्राप्त फिर बहुत बात बार ब्राह्मण भगवान भी भोजन मन मां मुझे में मैं यदि यमराज यह या रही राजा रानी रूप लगा लिया लेकर वर्ष वह वहां विष्णु वे वैशाख व्रत शुक्ल पक्ष श्री सब सभी समय सावित्री से स्नान ही हुआ हुई हूं हैं हो होकर होता है होती होने

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