Premanjali: प्रेमांजली

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Book Bazooka, Jan 31, 2018 - 96 pages
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"प्रेमांजली"महज एक कविता संग्रह नही बल्कि प्रेमपुष्प से सजी खुशबू बिखरेती बगिया है। जहां प्रेम का हर रूप है, मिलन की खुशी है तो विरह का गम भी है। खुशी के आंसू है तो दर्द से आंखे नम है। प्रकृति का सौंदर्य है तो मौसम का हर रंग है। खुशी दर्द आँसू है इश्क़ प्यार और मोहब्बत है। कविता है, गज़ल है, उल्फ़त की राह में हंसी बिखेरता कमल है। प्रेयसी का प्रेम है तो मां का वात्सल्य है।प्रेम के हर रूप हर रंग का दर्शन कराती प्रेमांजली आपको जरूर पसंद आएगी। आपका प्यार हमारे लिए अनमोल है आपके प्रेम और बहुमूल्य सुझावों के इंतजार में.....

आपका
पंकज भूषण पाठक "प्रियम"
 

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Contents

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Copyright

Common terms and phrases

अपना अपने अब आज इंतजार इक इश्क है इस उसे एक और कभी कर करो कह कहां का काम कि तुम हो किया किसी की कुछ के को कोई क्या क्यूं खुद ख्वाब गई गए गजल गम गयी गर चाँद चाहत छोड़ जब जहां जाए जाएंगे जाती है जाते जाना भी जिंदगी जिसे जो तन्हाई तुम्हारी तुम्हें तू तेरा तेरी तेरे तो तो लगता है था थी थे दर्द दिन दिया दिल को दिल में दिल से दुनिया देख देखा नही नहीं ना नाम ने पर पे प्यार प्रिये प्रेम फिर फूलों बदनाम बन बस भर भी तो भूल मन मिलने मुझे में भी मेरा मेरी मेरे मैं मैंने यही याद यारों यूं ये रहा रही रहे रात रूप लगता है लगता है कि लबों लिए ले वही वो शाम साथ हम हर पल ही हुआ हुई हूँ है कि तुम हैं हो गया होगा होता है होती

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