Premanjali: प्रेमांजली

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 "प्रेमांजली" महज एक कविता संग्रह नही बल्कि प्रेमपुष्प से सजी खुशबू बिखरेती बगिया है। जहां प्रेम का हर रूप है, मिलन की खुशी है तो विरह का गम भी है। खुशी के आंसू है तो दर्द से आंखे नम है। प्रकृति का सौंदर्य है तो मौसम का हर रंग है। खुशी दर्द आँसू है इश्क़ प्यार और मोहब्बत है। कविता है, गज़ल है, उल्फ़त की राह में हंसी बिखेरता कमल है। प्रेयसी का प्रेम है तो मां का वात्सल्य है।प्रेम के हर रूप हर रंग का दर्शन कराती प्रेमांजली आपको जरूर पसंद आएगी। आपका प्यार हमारे लिए अनमोल है आपके प्रेम और बहुमूल्य सुझावों के इंतजार में.....

आपका
पंकज भूषण पाठक "प्रियम"
 

Contents

Section 1
4
Section 2
6
Section 3
12
Section 4
16
Section 5
23
Section 6
33
Section 7
41
Section 8
58
Section 9
76
Section 10
82
Section 11
83
Section 12
94
Copyright

Common terms and phrases

अपना अपनी अपने अब आंखों में आज आये इंतजार इक इस उसे एक और कभी कर करो कली कह कहां का काम कि तुम हो किसी की कुछ के के लिए को कोई क्या क्यूं खुद गई गए गज़ल गम गयी चाँद चाहत छोड़ जब जहां जाए जाओ जाती है जाते जाना भी जिंदगी जो तन्हाई तस्वीर तुम्हारा तुम्हें तू तेरा तेरी तेरे तो तो इश्क़ है तो लगता है था थी थे दर्द दिन दिया दिल को दिल में दिल से देख देखा नजर नही नहीं ना नाम ने पर पे प्यार प्रिये प्रेम फिर फूलों बन बस बात भी भूल मन मुझे में भी मेरा मेरी मेरे मैं मैंने यही याद यारों यूँ ये रहा रही रहे रात रूप लगता है कि लबों ले वही वो शाम साथ सावन सी हम हर पल ही हुई हूँ हूँ तो हूँ मैं है कि तुम हैं होता है होती

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