राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रस्ताव: १९५० -२००७

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Suruchi Prakashan, Oct 1, 2007 - Political Science - 403 pages
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प्रति वर्ष राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा आयोजित अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा (ABPS) एवं कार्यकारी मंडल (KKM) द्वारा देश के समसामयिक समस्याओं पर मंथन- चिंतन किया जाता हैI इन सभाओं में पारित प्रस्तावों द्वारा जटिल समस्याओं पर सरल निदान प्रस्तुत किए जाते हैं जो सर्वथा राष्ट्रहित में होते हैंI सन् 1950 से 2007 के मध्य रखे गये  विभिन प्रस्तावों का संकलन इस पुस्तक में निहित हैI कुछ अत्यंत महत्वपूर्ण प्रस्ताव इस प्रकार हैं - देश-विभाजन के दुष्परिणाम और हमारा कर्तव्य, गौहत्या, कश्मीर समस्या, नेहरू - चाऊ एन लाई वार्ता, भाषा-नीति, चीन तथा पाक आक्रमण, बांग्लादेशी घुसपैठ, सामाजिक समरसता एवं धर्म निरपेक्षता (Secularism) I   

विभिन प्रस्तावों के विषय जन-सामान्य के जीवन पर पड़ने वाले दूरगामी परिणामों को उजागर कर एक सक्षम, सबल व सशक्त राष्ट्र के निर्माण की भूमिका व आधार रखते हैंI इस दृष्टि से यह पुस्तक संघ की गतिविधियों एवं इसके कर्मभाव व उद्देश्य को प्रतिबिंबित करती हैI

 

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अखिल भारतीय प्रतिनिधि अधिक अनेक अन्य अपना अपनी अपने असम आग्रह आज आदि आवाहन इन इस ईसाई उन उनके उन्हें उस उसके एक एवं ऐसे ओर कर करता करती है कि करना करने के लिए करे करें कश्मीर का कार्य कार्यकारी मंडल कि वह किन्तु किया है किये किसी की कुछ के कारण के प्रति के लिए के साथ केन्द्र केरल केवल को कोई क्षेत्र गया है गये चाहिए चीन जनता जा रही जाने जो तक तत्वों तथा तमिलनाडु तो त्रिपुरा था दिया देने देश के द्वारा नहीं नीति ने पंजाब पर पाकिस्तान प्रकार प्रस्ताव १ बांग्लादेश बात बिहार भा भारत के भारतीय प्रतिनिधि सभा भी मण्डल मुस्लिम में यह या रहा है रहे हैं राजनीतिक राज्य राष्ट्र राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ लोगों वहाँ वाले विदेशी शासन सब सभी समय सुरक्षा से स्थिति हिन्दुओं हिन्दू ही हुआ हुई हेतु है और है कि वे हो होगा होने

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