गुरु गोबिंद सिंह के काव्य में भारतीय संस्कृति

Front Cover
Suruchi Prakashan, Jun 1, 2013 - Poetry - 256 pages
0 Reviews

 Guru Gobind Singh the tenth Guru who gave his life to protect his religion, culture and country’s freedom. He awakened people and motivated them to stand for themselves. He established the ‘KHALSA-PANTH’ a military force of saint-soldiers, to whom he trained. He complied a number of books and poetry. Dr. Dharampal manny the author of the book has enlightened the brief character of Guru Gobind Singh ji which shows us a path to follw his great life.

 
 

What people are saying - Write a review

We haven't found any reviews in the usual places.

Common terms and phrases

अधिक अपना अपनी अपने अपितु अवतार आदि आधार इन इस प्रकार इसका इसी इसीलिए उनका उनकी उनके उन्हें उन्होंने उपयुक्त उस उसका उसकी उसके उसी उसे एक एवं ओर और औरंगजेब कबीर कभी कर दिया करता करते हुए करने के लिए कहा का काव्य किया है किसी की कुछ कृष्ण के कारण के माध्यम से को को भी कोई गए गुरु गोबिन्द सिंह गुरु जी ने गुरु नानक जब जा सकता है जीवन का जीवन में जो तक तथा तो था थी थे दिया दी दृष्टि धर्म धार्मिक न केवल नहीं नाम ने पर परम्परा परिचय पुन पुराण बना बहुत बाद भारत भारतीय भी महत्व मानव मुगल में में ही यह यहाँ यही या युग युद्ध रहा रहे राजनैतिक राम रूप में लिया लेकिन वर्णन वह वाले विरोध विशेष विष्णु वे व्यक्तित्व शक्ति संदेश संस्कृति सभी समाज साथ सामाजिक स्थान स्वीकार ही हुआ है हुई है और है कि हैं होने

Bibliographic information