आसमां के परिंदे

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Manojvm Publishing House, Mar 25, 2021 - Antiques & Collectibles - 496 pages

प्यार एक ऐसा शब्द है जो खुद में अपूर्णता लिए हुए इंसान को पूर्ण बना देता है। प्यार में डूबा इंसान अपने अंदर एक अलग ही परिवर्तन महसूस करता है जो सकारात्मक और नकारात्मक दोनों ही हो सकती है।

          प्यार एक ऐसा अहसास है जिसका मतलब केवल प्रेम करने से ही नहीं होता अपितु गुस्सा या डाँटना भी प्यार करने का प्रतिरूप होता है। जिस तरह एक माँ अपनी संतान को गलत करने से रोकने के लिए उस पर गुस्सा करती है या उसे फटकार लगाती है तो, इसका मतलब ये नहीं होता कि वो अपनी संतान से प्यार नहीं करती है। एक इंसान को सही दिशा दिखाने के लिए प्यार और डाँट दोनों की बराबर जरूरत होती है। किसी एक भाव को ही दिखाने से बात बिगड़ सकती है और इस बात का इंसान के व्यक्तित्व पर बहुत गहरा असर पड़ता है।

         ठीक इसी तरह ये प्रेम कहानी है सिमरन मल्होत्रा और अभिराज उपाध्याय की । सिमरन दिल्ली के एक पूर्ण रूप से सम्पन्न परिवार से है, वही अभिराज चेन्नई के एक अविकसित गाँव वेदन्तिपुरम में पला बढ़ा है। जहाँ सिमरन तमाम ऐशोआराम में पली बढ़ी, पढ़ी लिखी, नाजुक, मासूम, गैरजिम्मेदार और बेपरवाह लड़की है, वही अभिराज पढ़ा लिखा, समझदार, जिम्मेदार, कठोर व्यक्तित्व वाला, जिसके लिए उसका परिवार और गाँव ही सब कुछ है। दोनों का नेचर एक दूसरे से बिल्कुल जुदा है, एक पूरब है तो दूसरा पश्चिम । ये दोनों कैसे एक दूसरे से मिलते हैं और कैसे अभिराज का कठोर स्वभाव सिमरन के जीने का नजरिया इतना बदल देता है कि वो एक जिम्मेदार इंसान बन जाती है और अभिराज से नफ़रत करने लगती है। इस नफ़रत को अभिराज कैसे प्यार में बदलता है ये जानने के लिआसमां के परिंदे।

 

Common terms and phrases

अपनी अपने अब अभि ने अरे आई आकर आज आप आपकी आपके आपको आया आवाज इस इसलिए उन्हें उस उसका उसकी उसके उसे एक और और अभि कभी कमरे में कर करके करते करने का काम कि किया किसी की तरफ कुछ के लिए के साथ को कोई क्या गया गयी गयी और गये गाड़ी घर जब जया जा जाने जी जो ज्यादा तक तभी तरह तुम तो थी और दादू दिया देख देखकर देखा दोनों नही नही हैं नहीं नीचे पता पर परिवार पहले प्यार फिर फोन बस बहुत बात बाद बार बाहर बोला बोले भाभी भी मधु महेश मुँह मुझे मे में मेरा मेरी मेरे मै मैंने मॉम यहाँ या ये रहा था रही थी लगा लगी लता लेकर लेकिन लोग वक्त वो शादी सब सामने सिमरन ने से हम हाथ ही ही नही हुआ हुई हुए बोली हूँ है हैं हैं और हो हो गयी होगा

About the author (2021)

नाम: शालिनी सिंह

जन्म: 11 अप्रैल 1997 में गाँव सादाबाद, जिला हाथरस, उत्तर प्रदेश।

पिता: श्री राजेन्द्र सिंह

माता: श्रीमती चन्द्रकान्ता राजेन्द्र सिंह

पता: सेक्टर 105 गुरुग्राम , हरियाणा ।

पिनकोड: 122006

ईमेल: shalinisingh3636@gmail.com


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