Maharshi Visvamitra

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Suruchi Prakashan - 23 pages
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अपना अपनी अपने अब अयोध्या अहंकार आप आशीर्वाद आश्रम में इच्छा इस इसके इससे उनका उनकी उनके उन्हें उन्होंने उस उसका उसके उसने उसे ऋषि एक बार एवं ओर और कठोर कर दिया कर रहे करना का कामधेनु कि कि वे किया की के कारण के लिए के लिये के साथ केवल को कोई क्रोध क्षत्रिय गया गाय जनकपुर जब विश्वामित्र जाने जी ने जीवन जो तक तपस्या तो था थी थे देखकर देवेन्द्र देश दो दोनों द्वारा धनुष नंदिनी नहीं नामक निश्चय ने कहा पड़ा पर परन्तु परशुराम पशुओं पहुँचे पास पूर्ण प्राप्त प्रारंभ बहुत ब्रह्मर्षि ब्रह्मा भगवान भी मंत्र महर्षि वशिष्ठ मुझे मुनि यज्ञ यह राजा कौशिक राजा ने राज्य राम लक्ष्मण लगा लगे लिया ले वशिष्ठ के वह वहाँ विशाल विश्वामित्र ने व्यवस्था शक्ति शिव शुन:शयेप सकता सहायता सीता सुदास से सेना स्मरण स्वयं स्वर्ग हरिश्चंद्र ही हुआ हुई हुए हुये हेतु है हैं हो गये

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