भारत निकला गाँव से: Bharat Nikla Gaon Se

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Book Bazooka Publication, Feb 4, 2020 - Poetry - 72 pages

हम हैं इस मिट्टी के छौने हमें कुलांचें भरने दो,

बंद गली के बंद दरबाजे वो घर तुम्हें मुबारक हो । ।

अंधकारमय हो जीवन जिस जाति धर्म के बंधन में,

कितना भी सुन्दर हो, वो तुमको संसार मुबारक हो ।

जहाँ ठेकेदार धर्म के हों, और हो दलाल भगवंता के,

नारी है उपभोग समझते, हो बिचार उस जनता के ।

ऐसे धर्म समाज को मैं, ठोकर मार अभी दूँगा,

लेकिन बेटे की चाहत में, बेटी को विष नहीं दूँगा ।?

 

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About the author (2020)


नाम: राकेश कुशवाहा

जन्मतिथि: ०९ जुलाई १९८७

पिता: श्री मथुरी प्रसाद

माता: श्रीमती गोमती देवी

जीवन संगनी: अनीता

शिक्षा: कृषि स्नातक - जिला परिषद कृषि महाविद्यालय बाँदा, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय झाँसी ।

व्यवसाय: प्रबंधक (जैव विविधता, वानिकी एवं उद्यानिकी)

पता: ग्राम खुर्द, पोस्ट कुरथर, तेह- लहार, जिला भिंड, मध्यप्रदेश-477449

गुरु जी: पंकज सिंह परिहार, पुरोषत्तम दीबोलिया

विशेष आभार: भास्कर गुप्ता, फ़ुजैल अहमद, रिज़वान सिद्दीकी

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