Bhojdev Samaraṅgan Sutradhar

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Rajkamal Prakashan, Jan 1, 2005 - Architecture - 131 pages
Study with text and Hindi translation of Samarāṅganasūtradhāra of Bhojarāja, work on Hindu architecture and Vāstu.
 

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Contents

Section 1
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Section 4
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Section 5
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Section 8
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Section 18
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Section 10
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Section 11
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Section 20
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Section 21
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Common terms and phrases

अथवा अधिक अनेक अन्य अपने आदि इन इस प्रकार उस उसके उसमें उसे एक ऐसे ओर कर करता है करती करते करने करें कर्म कहते हैं कहलाता है कहा का किया कुछ के अनुसार के लिए के समान को गया है गयी गये ग्रन्थ घर चार चारों चाहिए जल जाती जो तक तत् तत्र तथा तद् तु था थी थे दक्षिण दिशा में दो दोनों द्वार धारा नगर नहीं नाम नामक ने प्राप्त प्रासाद बताते हैं बताया बताये भय भवन भवेत् भोज की मध्य मन्दिर मार्ग में भी यत् यदि यह या ये रहा राजा भोज राजा भोज की रूप वह वा वाग्देवी वाले वास्तु विभिन्न विस्तार वे शाला श्लोक सदा सब सभी समरांगणसूत्रधार समस्त सरस्वतीकण्ठाभरण सहित सा से स्यात् स्वयं स्वामी हाथ ही हुआ हुए है और है कि है वह हो जाता है हो तो हों होता है होती होते हैं होने पर

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