Manav Shareer--Rachna, Part 2

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Motilal Banarsidass Publishe
This work is an exposition of the philosophic conceptions basic to Mahayana Buddhsim as found in the Maha-prajnaparamita-sastra a commentary on the Prajnaparamita-sutras and traditionally attributed to Nagarjuna. The sastra the earlist and most extensive work in this field is lost in its sanskrit original and preserved only in a Chinese translation. Meaning of sanskrit and chinese terms are expounded concepts are made clear and supplementary materials are supplied in the notes
 

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Contents

Section 1
544
Section 2
545
Section 3
551
Section 4
560
Section 5
581
Section 6
598
Section 7
606
Section 8
646
Section 18
813
Section 19
815
Section 20
824
Section 21
827
Section 22
832
Section 23
848
Section 24
923
Section 25
933

Section 9
654
Section 10
678
Section 11
700
Section 12
708
Section 13
709
Section 14
736
Section 15
770
Section 16
797
Section 17
810
Section 26
945
Section 27
996
Section 28
1002
Section 29
1006
Section 30
1026
Section 31
1034
Section 32
1057
Section 33
1061

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Common terms and phrases

अंगुलि अग्र अनुप्रस्थ अन्त अभिमध्य अभिमध्य ओर आकुंचनी आभ्यन्तर इस इसके उदय उपरिस्थ उसके ऊपर ऊपर की ऊर्ध्व एक करती है कला कशेरुका का किन्तु की ओर कुछ के अग्र के अभिमध्य के नीचे के पश्च के पार्श्व के पीछे के बीच में के साथ के सामने को क्रिया गति गभीर ग्रीवा चाप जाकर जाता जाती है जाते तंतु तंत्रिका तक तथा तान्तव त्रिभुज त्वचा दक्षिण दूसरी दृ दो दोनों द्वारा धमनियों धमनी के धारा नहीं निकलती निम्न निवेश नीचे पर पश्च पार्श्व पृष्ट पर पेशियों पेशी प्रकार प्रथम प्रान्त प्रावरणी बाहर बाह्य भाग के भाग में भी मध्य मिल में विभक्त यह या ये रक्त रहती है रेखा लघु लसीका वक्ष वाम वाली शाखा शाखाओं शाखायें शिर शिरा शिराओं शिरायें संधि संभरण से स्थित है स्नायु ही हुआ हुई है हुए है और है जो हैं हो जाती है होकर होता है होती होते

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