Prasad Kavya Mein Bimb Yojana

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Lokbharti Prakashan, Sep 1, 2007 - 362 pages
 

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अंकित अथवा अधिक अनुभूति अनेक अपने अमूर्त आदि इन इलाहाबाद इस प्रकार इसी उनके उन्होंने उपस्थित उस उसकी उसके उसमें उसे एक ओर कर करती करते करने कल्पना कवि ने कहीं का कामायनी काल कालिदास काव्य में किन्तु किया गया है किया है किये किसी की है कुछ के कारण के बिम्ब के बिम्बों के रूप में के लिए के साथ केवल को चित्रण छायावादी जब जा जाता है जाती जी के जीवन जैसे जो तक तो था थी दिया दृश्य दो दोनों द्वारा ध्वनि नहीं निराला पर पृ० प्रकृति प्रथम प्रभाव प्रयोग प्रसाद के प्रसाद जी ने प्रसाद-काव्य में प्राय बिम्ब की बिम्बों की बिम्बों में भाव मन मनु में भी यह यहाँ या ये रहा लहर वर्ण वह वाले विभिन्न वे शब्द श्रद्धा संवेदना सकता सी सुन्दर से स्थान स्पर्श ही हुआ है हुई हुए है और है कि है है हैं हो होता है होती होते होने

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