Surya

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Rajkamal Prakashan, Sep 1, 2005 - 80 pages
धरती का समूचा जीवन सूर्य पर निर्भर है । इसलिए यदि यह कहा जाए कि सूर्य के बारे में जानना विश्व-जीवन को जानना है, तो गलत न होगा । इस नाते खगोल विज्ञान विषयक हिंदी लेखकों में अग्रगण्य गुणाकर मुले की यह पुस्तक न सिर्फ अद्यतन जानकारियों, बल्कि अपने सरल और रोचक भाषा- शिल्प की दृष्टि से भी अत्यंत महत्त्वपूर्ण है । विद्वान लेखक ने इस कृति को सूर्य और हम, सूर्य देवता, सूर्य. एक सामान्य तारा, सूर्य का परिवार, किरणों की भाषा, सूर्य की भट्ठी, सूर्य की सतह और इसका बाहय वातावरण, पृथ्वी पर सूर्य का प्रभाव, सूर्य का जन्म और अंत नामक नौ अध्यायों में बाँटा है । साथ ही परिशिष्ट में सूर्य संबंधी विशिष्ट कड़े और तत्संबंधी हिंदी - अंग्रेजी पारिभाषिक .शब्दावली इस पुस्तक को और अधिक उपयोगी बनाते हैं । लेखक के .शब्दों को उद्धृत करें तो '' हिंदी में सूर्य पर यह अपनी तरह की पहली पुस्तक है । '' दरअसल पृथ्वी से सूर्य की दूरी, सूर्य के व्यास, सूर्य-सतह के क्षेत्रफल, उसके आयतन, द्रव्यमान, औसत घनत्व, घूर्णन-काल, उसकी सतह और केंद्र के तापमान आदि खगोल भौतिकी के जटिल आंकडे कहानी की तरह रोचक होकर हमारे सामने आते हैं, फलस्वरूप ज्ञान का एक विराट कोश सहज ही हमारे भीतर समा जाता है ।
 

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Contents

Section 1
4
Section 2
15
Section 3
16
Section 4
19
Section 5
20
Section 6
40
Section 7
62

Common terms and phrases

अत अधिक अन्य अपनी अब अरब आकाश आकाशगंगा आज इन इस इसका इसके इसलिए इसी उपग्रह उपर उब उस ऐसे कई कर करता है करते हैं करने करीब का का अध्ययन कारण कि सूर्य किरणों किलोमीटर की की सतह के खारे में के लिए के समय को कोई खोज गए गया गुना घनत्व जब जा जाता है जाती जानकारी जानते हैं तक तथा तापमान तारा तारे तारों के तो था थी थे दिखाई दूर दूरी दूसरे देखा देवता दो द्रव्य धरती नहीं है नाभिक ने पर परि परिक्रमा करते पृथ्वी के पैदा प्याज प्रकार प्राप्त बना बने बहुत बारे भी भौतिकी मंदाकिनी में ही यम यह या यूनान ये लगभग लेकिन वायुमंडल विम विशेष वैज्ञानिक सकता सकते हैं सबसे सभी साल सुन सूर्य के से हम हमारी हमारे हमें ही हुआ हुई है और है कि है है हो होगा होता है होती होते हैं

About the author (2005)

जन्म : विदर्भ के अमरावती जिले के सिंदी बुजरूक गांव में, 3 जनवरी, 1935 को। आरंभिक पढ़ाई गांव के मराठी माध्यम के स्कूल में। स्नातक और स्नातकोत्तर (गणित) अध्ययन इलाहाबाद विश्वविद्यालय में। आरंभ से ही स्वतंत्र लेखन। विज्ञान, विज्ञान का इतिहास, पुरातत्व, पुरालिपिशास्त्र, मुद्राशास्त्र और भारतीय इतिहास व संस्कृति से संबंधित विषयों पर करीब 35 मौलिक पुस्तकें और 3000 से ऊपर लेख हिंदी में और लगभग 250 लेख अंग्रेजी में प्रकाशित। विज्ञान, इतिहास और दर्शन से संबंधित दर्जन-भर ग्रंथों का हिंदी में अनुवाद। सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण केंद्र (नई दिल्ली) द्वारा अध्यापकों के लिए आयोजित प्रशिक्षण-शिविरों में लगभग एक दशक तक वैज्ञानिक विषयों पर व्याख्यान देते रहे। भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद् (नई दिल्ली) द्वारा प्रदत्त सीनियर फैलोशिप के अंतर्गत 'भारतीय विज्ञान और टेक्नोलॉजी का इतिहास’ से संबंधित साहित्य का अध्ययन-अनुशीलन। विज्ञान प्रसार (विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार) के दो साल फेलो रहे। प्रमुख कृतियां : अक्षर-कथा, भारत : इतिहास और संस्कृति, आकाश-दर्शन, संसार के महान गणितज्ञ, तारों भरा आकाश, भारतीय इतिहास में विज्ञान, नक्षत्र-लोक, अंतरिक्ष-यात्र, सौरमंडल, महापंडित राहुल सांकृत्यायन, महाराष्ट्र के दुर्ग, गणितज्ञ-ज्योतिषी आर्यभट, भारतीय अंक-पद्धति की कहानी, भारतीय लिपियों की कहानी, भारतीय विज्ञान की कहानी, भारतीय सिक्कों का इतिहास, भास्कराचार्य, कंप्यूटर क्या है, कैसी होगी इक्कीसवीं सदी, खंडहर बोलते हैं, बीसवीं सदी में भौतिक विज्ञान, कृषि-कथा, महान वैज्ञानिक महिलाएं, प्राचीन भारत में विज्ञान, भारत के प्रसिद्ध किले, हमारी प्रमुख राष्ट्रीय प्रयोगशालाएं, गणित की पहेलियां, भारत : इतिहास, संस्कृति और विज्ञान आदि। पुरस्कार-सम्मान : हिंदी अकादमी (दिल्ली) का साहित्य सम्मान पुरस्कार। केंद्रीय हिंदी संस्थान (आगरा) का आत्माराम पुरस्कार। बिहार सरकार के राजभाषा विभाग का जननायक कर्पूरी ठाकुर पुरस्कार। मराठी विज्ञान परिषद् (मुंबई) द्वारा श्रेष्ठ विज्ञान-लेखन के लिए सम्मानित। 'आकाश-दर्शन’ व 'संसार के महान गणितज्ञ’ ग्रंथों के लिए प्रथम मेघनाद साहा पुरस्कार। राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद् (NCSTC) का राष्ट्रीय पुरस्कार। निधन : 16 अक्टूबर, 2009

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