Brihat Pramanik Hindi KoshLokbharati Prakashan, Sep 1, 2006 - 1088 pages आचार्य रामचंद्र वर्मा द्वारा सम्पादित प्रामाणिक हिंदी कोश का उपयोग पिछले 50 वर्षों से हिंदी-प्रेमी निरंतर करते चले आ रहे हैं ! प्रस्तुत बृहत् संस्करण वर्मा जी के मानदंडों के अनुरूप तथा वर्तमान आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है ! सैकड़ों शब्दों को ढूंढ-ढूढकर इस कोश में स्थान दिया गया है जो पहले से हमारी भाषा के अंग हैं, परन्तु जिनका आज तक कोशों में समावेश नहीं हो पाया ! आंचलिक तथा प्रादेशिक रचनाकारों के कुछ ऐसे शब्दों को भी इस कोश में स्थान दिया गया है जो हिंदी साहित्य में अपना स्थान बना पाए हैं ! समस्त पदों में पूर्वपद या उत्तरपद के रूप में कुछ विशिष्ठ शब्दों के योग से बने नए शब्दों की बहुलता भी इस कोश में दर्शनीय है ! विज्ञान, प्रोद्योगिकी, वाणिज्य, प्रशासन, जनसंचार आदि क्षेत्रों में प्रयुक्त होनेवाले अंग्रेजी भाषा के ऐसे शब्दों को भी इस कोश में स्थान दिया गया है जिनका व्यापक रूप से इधर प्रयोग हो रहा है! इस कोश में पहली बार ऐसे सैकड़ों क्रिया-विशेषण, विशेषण तथा संज्ञा शब्दों की प्रविशिथियाँ मिलेंगी जो संबंद बोधाकों की तरह प्रयुक्त होते हैं ! इधर सहस्त्रों हिंदी शब्दों में नए अर्थ विकसित हुए हैं ! ऐसे अर्थों को संजोने तथा विश्लेषित करने का काम इस बृहत् संस्करण का विशेष ध्येय रहा है ! अरबी, फारसी, रुत्की आदि के अधिकतर प्रचलित शब्दों को मूल शुद्ध रूप में दिखने का प्रयास किया गया है ! अनेक शब्द भेड़ों में जिन शब्दों को बांटा जा सकता है ऐसे शब्दों को प्रयोग के आधार पर क्रिया-विशेषण, योजक, निपट, विस्म्यादिक, सम्बन्ध बोधक आदि नामों से अभिहित किया गया है ! लिंग-संबंधी भी अनेक भूलें ठीक की गई हैं ! अनेक शब्दों की व्युप्प्ती में भी सुधर किया गया है ! विगत छः वर्षो से सहस्त्रों नए शब्द हमारी भाषा में प्रविष्ट हुए हैं ! इनमे से जिनका पत्र-पत्रिकाओं में विशेष रूप से प्रयोग देखने को मिला, उन्हें इस नविन संस्करण में सम्मिलित कर लिया गया है ! निश्चय ही यह कोश, विद्यार्थियों, लेखकों, अध्यापकों, संपादकों, पत्रकारों, शोधार्थियों इत्यादिके लिए अत्यंत उपयोगी तथा विश्वसनीय है ! |



