Charaksamhita Mahrishina Bhagvataniveshen Pranita Mahamunina Charken Pratisanskrita Purvo Bhag

Front Cover
Motilal Banarsidass Publishe, 2007
 

What people are saying - Write a review

User Review - Flag as inappropriate

""आयुर्वेदम् इति उच्चते।""👍👌👌

User Review - Flag as inappropriate

There should also be an option to download the complete book.

Contents

Section 1
Section 2
Section 3
Section 4
Section 5
Section 6
Section 7
Section 8
Section 11
Section 12
Section 13
Section 14
Section 15
Section 16
Section 17
Section 18

Section 9
Section 10
Section 19

Common terms and phrases

अ० अत अथवा अधिक अध्याय में अन्य अपने अर्थात् आत्मा आदि आदि के आयुर्वेद इति इन इस प्रकार इसी उस उसे एक एवं औषध कफ कम कर करके करता है करते करना चाहिये करने करनेवाले कर्म कहते कहा कहा है का काल किया की के कारण के गुण के लक्षण के लिये को गया है गये ग्रहण चाहिये चिकित्सा जब जल जाती जाते जाय जैसे जो तथा तीन तु तो दिन दो दोनों दोष द्रव्य द्वारा नहीं नाम ने पर परन्तु पित्त पुरुष प्रकार प्रकार के प्रयोग बल भेद मन में कहा में भी यदि यह यहाँ या युक्त ये रक्त रस रूप रोग रोगी रोगों वसा वह वा वात वायु विषय वे शरीर सकता सकते सब समय साथ सुश्रुत सेवन स्नेह ही हुआ हुई हुए है और है कि है है है हैं होता है होती होते होना होने से

Bibliographic information