Bharat Ka Rashtriya Vriksh Aur Rajyo Ke Rajya Vriksh

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Radhakrishna Prakashan, Jan 1, 2014 - State trees - 375 pages
भारत का राष्ट्रीय वृक्ष और राज्यों के राज्य वृक्ष एक अनूठी पुस्तक है। इसका उद्देश्य है पाठकों को अपने पर्यावरण के प्रति सचेत व सहृदय बनाना। इस पुस्तक में भारत के राष्ट्रीय वृक्ष सहित 25 राज्यों और 2 केन्द्रशासित प्रदेशों के राज्य वृक्षों का परिचय दिया गया है। छत्तीसगढ़, दिल्ली, गुजरात और मध्य प्रदेश ऐसे राज्य हैं, जिन्होंने अभी तक अपने राज्य वृक्ष घोषित नहीं किए हैं। इसके साथ ही चंडीगढ़, दादर नगर हवेली, दमन एवं दीव और पांडिचेरी के भी राज्य वृक्ष नहीं हैं। केन्द्रशासित प्रदेशों में केवल लक्षद्वीप और अंडमान-निकोबार ने अपने राज्य वृक्ष घोषित किए हैं। भारत का राष्ट्रीय वृक्ष बरगद है। यह उड़ीसा का राज्य वृक्ष भी है। लगभग ऐसी ही स्थिति पीपल और हुलुंग की है। पीपल को बिहार और हरियाणा दोनों ने अपना राज्य वृक्ष घोषित किया है। हुलुंग विश्व भर में होलांग के नाम से प्रसिद्ध है। हुलुंग को अरुणाचल प्रदेश और असम दोनों ने अपना राज्य वृक्ष माना है। प्रत्येक वृक्ष के परिचय में वृक्ष का हिन्दी नाम, अंग्रेजी नाम और वैज्ञानिक नाम दिया गया है। पुस्तक का उद्देश्य वृक्षों से सम्बन्धित भ्रामक धारणाओं का खंडन करते हुए वैज्ञानिक जानकारियाँ प्रदान करना और इनके महत्त्व एवं उपयोग से परिचित कराना है। समाजशास्त्री और पर्यावरणविद् डॉ. परशुराम शुक्ल ने उक्त उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए इस पुस्तक में वृक्षों के बारे में विस्तार से जानकारियाँ दी हैं। ये रोचक और ज्ञानवद्र्धक हैं। हिन्दी में अपने विषय पर यह अकेली पुस्तक है।
 

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Contents

Section 1
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Section 3
17
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Section 5
31
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Section 8
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Section 17
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Section 15
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Section 16
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Section 25
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Section 26
331
Section 27
343
Section 28
360
Section 29
367
Section 30
368
Copyright

Common terms and phrases

अगर अथवा अधिक अनेक अन्य अपनी अपने आदि आम इन इस इसका इसकी इसके इसके लिए इससे इसी इसे उपयोग उसके उसने उसे एक एवं ओर औषधि कर करके करते हैं करने से का का उपयोग किन्तु किया जाता है की की छाल की लकड़ी कुछ के बाद के लिए के वृक्ष के समान को गई गए ग्राम चन्दन चिनार चूर्ण जाते हैं जाने तक तरह तेल तो था थी थे दिन दिया दूध दोनों नहीं नारियल नीम नीम की ने पत्तियाँ पर पानी पास पीपल पीपल के प्रकार के फल फूल बड़ी बरगद बहुत भाग भी भैरवी मीटर में में भी यह यहाँ ये रंग रहा राजा राज्य रानी रूप से रोगों लेते हैं वह वृक्ष वृक्ष के वृक्ष है वृक्षों सभी समय से से लेकर सेन्टीमीटर से सेवन हिमालय ही हुए हुलुग है कि है तथा हैं और हो जाता है होता है होती होते हैं होने

About the author (2014)

जन्म : 6 जून, 1947, कानपुर (उत्तर प्रदेश)। शिक्षा : एम.ए., पी-एच.डी.। प्रकाशन : 'भारतीय वन्यजीव’ (पुरस्कृत), 'भारतीय हिरन और गवय’, 'भारत का राष्ट्रीय पशु और राज्यों के राज्य पशु’ सहित दो दर्जन से अधिक पुस्तकें और 6 हजार से अधिक स्फुट रचनाएँ प्रकाशित। अनेक रचनाओं का विभिन्न भारतीय भाषाओं में अनुवाद। पुरस्कार एवं सम्मान : समाज कल्याण मंत्रालय; पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली; चिल्ड्रंस बुक ट्रस्ट ऑफ इंडिया, नई दिल्ली; हिन्दी अकादमी, हैदराबाद सहित अनेक संस्थाओं द्वारा पुरस्कृत एवं सम्मानित। सम्पर्क : 100, पंचशील नगर, सिविल लाइंस, दतिया-475661 (मध्य प्रदेश)। स्थायी निवास : बी-20, नीलम कॉलोनी, जहाँगीराबाद, भोपाल-462008 (मध्य प्रदेश)।

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