Vigyaana Bhairava

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Motilal Banarsidass Publishe, 2000
deities, has a long history in Indian art and literature. This study traces
 

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wah ji wah param aanad.....

Common terms and phrases

अत अथवा अपनी अपने अभिनवगुप्त अभिप्राय अभ्यास अर्थ अर्थात अवस्था अशान्त आत्मा आदि आधार इति इन इस तरह से इसका इसके इसी उस उसके ऊपर एक कर करता करते करने कहा का किन्तु किया किसी की कुछ के रूप में के लिये को कोई क्षेमराज ग्रन्थ चाहिये चित्त जब जा जाती जाने पर जैसे जो ज्ञान तक तत्व तथा तन्त्र तब तो दर्शन दशा धारणा नहीं नहीं है ने पद पर परम परमेश्वर परा पृ० प्रकार प्रस्तुत प्राण बताया बात बाह्य भाव भावना भैरव भैरवी मन माना में भी मैं यह यहाँ या ये योगी रहता रहती वह वा वाले विद्यमान विषय विस्तार व्याख्या शक्ति शब्द शरीर शाक्त शिव सकता सब सभी समय साधक स्थान स्थिति स्थिर स्वरूप ही हुए हूँ हृदय है और है कि है है हैं हो जाता है हो जाने होता है होती होने

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