Bhāratīya śikhāra kathā kośa: Malayālama kahāniyām̐

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Subodh Pocket Books, 1990 - Short stories, Indic - 224 pages
 

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Contents

Section 1
5
Section 2
19
Section 3
21
Section 4
25
Section 5
29
Section 6
32
Section 7
41
Section 8
57
Section 16
123
Section 17
134
Section 18
140
Section 19
144
Section 20
150
Section 21
155
Section 22
159
Section 23
164

Section 9
68
Section 10
75
Section 11
86
Section 12
98
Section 13
106
Section 14
111
Section 15
117
Section 24
170
Section 25
176
Section 26
184
Section 27
193
Section 28
199
Section 29
205
Section 30
212

Common terms and phrases

अंदर अपनी अपने अब आज आने आया आवाज इधर इम इस उई उगे उन उन्हें उम उस उसका उसकी उसके उसको उसने उसी उसे एक ऐसा और कमरे कर करके करने कहा कहानी कहीं का कार किया किसी की कुछ के लिए के साथ को खडा गयी गये घर जब जा जाता जाने जी जीवन तक तब तरह तो था था कि थाना थी थे दरवाजा दिन दिया देख देखा देर नहीं नायर नारियल ने पत्नी पर पवई पहले पार्वती पास पी पीछे फिर बच्चे बया बात बाद बार बाहर भी भेरी मन मलयालम माधवी मुझे में मेरी मेरे मैं मैंने यम यया यर यल यह यहीं या रहा रहा था रही रहीं रहे रात रे लगा लगी लिया वना वने वया वरों वह वहीं वाले वे सामने सिर से हम हाथ ही हुआ हुई हुए है कि है है हैं हो गया होकर होगा होगी होता होने

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