Andhera

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Rajkamal Prakashan, Jan 1, 2006 - Short stories, Hindi - 178 pages
अँधेरा वजूश्द, यक्षगान, ग्रहण और अँधेरा महज चार लम्बी कहानियाँ नहीं हैं - ये हमारे कथा साहित्य की विरल उपलब्धियाँ हैं। इन्हीं चारों कहानियों से तैयार हुआ है अत्यंत महत्त्वपूर्ण और बहुचर्चित कथाकार अखिलेश का नया कहानी-संग्रह अँधेरा। अखिलेश हिन्दी की ऐसी विशिष्ट प्रतिभा हैं जिनके लेखन को लेकर साहित्य- जगत उत्सुक और प्रतीक्षारत रहता है। अखिलेश की रचनात्मकता के प्रति गहरे भरोसे का ही नतीजा है कि उनकी रचनाएँ साहित्य की दुनिया में ख़ास मुकाम हासिल करती हैं। निश्चय ही इस अनोखे विश्वास के निर्माण में अँधेरा की कहानियों की अहम भूमिका है। अँधेरा में शामिल चारों कहानियाँ लगातार चर्चा के केन्द्र में रही हैं। इन्हें जो ध्यानाकर्षण - जो शोहरत मिली है, वह कम रचनाओं को नसीब होती है। इनके बारे में अनेक प्रकार की व्याख्याएँ, आलेख, टिप्पणियाँ और विवाद समय-समय पर प्रकट हुए हैं। पर इन सबसे ज़्यादा ज़रूरी बात यह है कि चारों कहानियों पर पाठकों ने भी मुहर लगाई है। हमारे युग की मनुष्य विरोधी शक्तियों से आख्यान की भिड़न्त, भाषा की शक्ति, शिल्प का वैविध्य तथा उत्कर्ष, प्रतिभा की विस्फोटक सामर्थ्य - ये सभी कुछ कोई एक जगह देखना चाहता है तो उसे अखिलेश का कहानी-संग्रह अँधेरा अवश्य पढ़ना चाहिए। अँधेरा की कहानियों की ताक़त है कि वे अपने कई-कई पाठ के लिए बेचैन करती हैं। यही नहीं, वे प्रत्येक अगले पाठ में नई व्यंजना, नए अर्थ, नए सौन्दर्य से जगमगाने लगती हैं। इसी बिन्दु पर अँधेरा की कहानियाँ न केवल पढ़े जाने और एकाधिक बार पढ़े जाने की इच्छा जगाती हैं, बल्कि सहेजकर रखे जाने की ज़रूरत भी पैदा करती हैं।
 

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Contents

Section 1
4
Section 2
9
Section 3
49
Section 4
89
Section 5
100
Section 6
123
Section 7
139
Section 8
181

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Common terms and phrases

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About the author (2006)

अखिलेश जन्म : 1960, सुल्तानपुर (उ.प्र.)। शिक्षा : एम.ए. (हिन्दी साहित्य), इलाहाबाद विश्वविद्यालय। प्रकाशित कृतियाँ—कहानी-संग्रह : आदमी नहीं टूटता, मुक्ति, शापग्रस्त, अँधेरा। उपन्यास : अन्वेषण। सृजनात्मक गद्य : वह जो यथार्थ था। आलोचना : श्रीलाल शुक्ल की दुनिया (सं.)। सम्पादन : वर्तमान साहित्य, अतएव पत्रिकाओं में समय-समय पर सम्पादन। आजकल प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिका तद्भव के सम्पादक। 'एक कहानी एक किताब' शृंखला की दस पुस्तकों के शृंखला सम्पादक। 'दस बेमिसाल प्रेम कहानियाँ' का सम्पादन। अन्य : देश के महत्त्वपूर्ण निर्देशकों द्वारा कई कहानियों का मंचन एवं नाट्य रूपान्तरण। कुछ कहानियों का दूरदर्शन हेतु फिल्मांकन। टेलिविजन के लिए पटकथा एवं संवाद लेखन। अनेक भारतीय भाषाओं में रचनाओं के अनुवाद प्रकाशित। पुरस्कार/सम्मान : श्रीकांत वर्मा सम्मान, इन्दु शर्मा कथा सम्मान, परिमल सम्मान, वनमाली सम्मान, अयोध्या प्रसाद खत्री सम्मान, स्पन्दन पुरस्कार, बाल कृष्ण शर्मा नवीन पुरस्कार, कथा अवार्ड। सम्पर्क : 18/201, इन्दिरानगर, लखनऊ-226016 (उ.प्र.)। मो. : 09415159243

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