Harshacaritam (5-8 Ucchwas) Bhag 2

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Motilal Banarsidass Publishe
This book is a manual of practical astrology designed to enable the reader to handle queries relating to various facets of everyday life successfully.
 

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Contents

Section 1
283
Section 2
285
Section 3
288
Section 4
343
Section 5
353
Section 6
415
Section 7
416
Section 8
421
Section 9
459
Section 10
465
Section 11
485
Section 12
486
Section 13
487
Section 14
518
Section 15
546
Section 16
547

Common terms and phrases

अतिशयेन अत्र अथवा अन्यत्र अपना अपने अपि अर्थात् इति यावत् इत्यमरः इत्यर्थः इव इवेत्युत्प्रेक्षायाम् इवेत्युपमायाम् उपरि उसके उसने उसे एक एव एवं और कर करता करते करने का किन्तु किया किये की तरह कुछ के कारण के लिए के समान को क्या गई गए गया जल जा रहे जाता जाने पर जैसे जो तक तत् तथा तम् तया तस्य ताम् तु ते तेन तेषां तो दिया देने द्वारा नहीं नाम ने पड़े पर पिता पृथिवी फिर बना बने बहुत भवति भावः भी मानो मुख मे में यः यत् यत्र यथा स्यात्तथा यदि यस्मिन् यस्य यस्य सः यस्याः यह या यानि ये येन येषु रखे रहा था रहा है रही थी रहे थे राजा राज्ञः ले लोगों वह वा वाला वाली वाले वे शरीर शेषः शोक श्वेत सभी सह सा साथ सूर्य से हर्षवर्धन हि ही हुआ हुई हुए हृदय है है कि हैं हो होता होने

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