Phul Bahadur: फूल बहादुर (1928)

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Pyara Kerketta Foundation, Apr 1, 1928 - 62 pages
यह जयनाथ पति लिखित मगही का पहिला उपलब्ध उपन्यास है। इसका प्रकाशन 1928 में हुआ था। इस मगही उपन्यास के केन्द्र में मनुष्य का नैतिक पतन और ब्रिटिशकालीन भारत में व्याप्त भ्रष्टाचार है।
 

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अच्छा अपन अपने अब आउ आझ आदमी आल उ सब उनकर उपन्यास उर्दू एक एकर एकरा में एहे ऐसन ओकर ओकरा से कर करके करते करे का काम काहे कि किताब की कुछ के नाम के बात कैल कैलका कोई कोए खूब खेयाल गेल हे गेला चाय जगह जब जयनाथ पति जरूर जा जाए जात जादे जी जे तक तब तु तू तो दिन दूसर दे दे-ख देल देलका नवाब साहेब नसीबन ने नै पटना पर पहिला पहिले फूल बहादुर फेर बड़ा बड़ी बहुत बाकी बात बाद बिहार बोलला भाषा भी मगही के मातृभाषा मालूम में मोकदमा मोखतार मोसकिल रहला रहे रांची राम रुपया लिखल ले लोग सके हे सब के समाज साम सामलाल सिंघजी सुनीता से हथ हम हमर हमरा हल हलधर सिंघ हलन हला हां हाथ हिंदी ही हुजुर हे और हे कि है हो गेल होत होल होवे हे

About the author (1928)

जयनाथ पति (1880-1939) मगही भाषा के पहले उपन्यासकार, भारतीय इतिहास व संस्कृति के प्रमुख विद्वान और स्वतंत्रता सेनानी हैं। आपका जन्म जिला नवादा (बिहार) के गांव शादीपुर, पो. कादरीगंज के कायस्थ परिवार में 1880 में हुआ था।अनेक भाषाओं के मर्मज्ञ जयनाथ पति ने मगही के साथ-साथ अंग्रेजी में अनेक विचारोत्तेजक लेख लिखे हैं जो 1920 से 1935 के दौरान प्रकाशित हुए। पेशे से प्रथम श्रेणी के मोख्तार जयनाथ पति संस्कृत, अंग्रेजी, बंगला, लैटिन, फारसी, उर्दू, हिन्दी और मगही के प्रकांड विद्वान थे। उनकी प्रतिभा इतनी विलक्षण थी कि वह एक ही समय में अपनी दोनों हाथों से अलग-अलग भाषाओं में लिखने का काम बड़ी ही कुशलता के साथ किया करते थे। आपने फारसी लोकगीतों और ऋग्वेद का भी अनुवाद किया है। इनकी मृत्यु टायफाइड बीमारी से 21 सितंबर 1939 को पीएमसीएच, पटना के पेईंगवार्ड में हुई।

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