Vyakaran Siddhant Kaumudi (Bhattojidikshivirchit)

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Motilal Banarsidass Publishe
The present edition, revised and enlarged by the author himself, presents the old genuine Buddha doctrine with the aim of developing a new type of man, free from prejudices and intent on working out his own future with his self as the light. It represents not only the flower of Indian religious feeling and philosophy but also the crowning summit of religious introspection in general. The book deals with Truth as the theme and basis of the doctrine of the Buddha. It explains
 

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ATI UTTAM KARYA . IS MAHAN KARYA KE LIYE AAP DHANYAWAD KE PATRA HAI**************JAI MAA VISHALAKSHI.

Contents

Section 1
Section 2
Section 3
Section 4
Section 5
Section 6
Section 7
Section 8
Section 9
Section 10
Section 11
Section 12
Section 13
Section 14

Common terms and phrases

अत अता अन्य अब अर्थ में आई आदि आधार इति इन इस प्रकार इस सूत्र से इसका इसी उदाहरण उसका उसके उससे एक कर करण करता है करने कर्ता कर्म संज्ञा कहते कहा का अर्थ का प्रयोग कारक की की कर्म कृष्ण के द्वारा के योग में के लिये के साथ को क्योंकि क्रिया के गई ग्रहण चतुर्थी जब जा जाता है जाती जो तब तो दो दोनों द्वितीया द्वितीया विभक्ति धातु धातु के धातुओं नहीं निषेध पद पद का पूर्व प्रकट प्रति प्रतीत प्रत्यय प्रथमा प्राप्त फल भी में भी यह यहाँ ये रूप वह वा विभक्ति आती है विशेष विषय शब्द से संज्ञा होती है सप्तमी सम्बन्ध सिद्ध सूत्र में सूत्र से से द्वितीया स्यात् हरि ही हुआ हुई हेतु है और है कि है है हैं हो जाता है होता है होने के कारण होने पर होने से

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