Prācīna bhāratīya mudrāyeṃ

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Motilal Banarsidass Publishe, 2009 - 272 pages
 

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Contents

Section 1
1
Section 2
25
Section 3
26
Section 4
40
Section 5
42
Section 6
52
Section 7
56
Section 8
64
Section 11
191
Section 12
243
Section 13
263
Section 14
265
Section 15
270
Section 16
278
Section 17
279
Section 18
283

Section 9
125
Section 10
149
Section 19
287
Section 20
289

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Common terms and phrases

अंकित है अथवा अपने अयोध्या आकृति आहत मुद्राओं इन इस इस प्रकार इस मुद्रा इसके उपाधि उल्लेखनीय है कि उसके एक एवं और कतिपय कर करते करने का अंकन का अंकन है का उल्लेख काल किन्तु किया किया है की मुद्रा की मुद्राओं की मुद्राओं पर कुछ कुषाण के आधार के मुरोभाग के रूप में के साथ को क्षेत्र गया है गुप्त ग्रेन चिन्ह जो तक तथा ताम्र तो तौल था थी थे दृ देवी दो दोनों द्वारा नाम ने पंजाब पर पुरोभाग पर पूर्व पृष्ठभाग पर प्रकार की प्रथम प्राप्त हुयी प्राप्त होता है भाग भारत भारतीय भी मत मथुरा महोदय मिलता है मुद्रा के मुद्राएँ मुद्राओं के यर यह यूनानी ये रजत राजा का शासक शासन शिव श्री समुद्रगुप्त सातवाहन से से प्राप्त स्थानक स्वर्ण स्वीकार हाथ में ही हुआ है हुई हुये है कि हैं हो होता है कि होती होने

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