Bhartiya Sanskriti Ka Muladhar Purusharth Chatustya

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Educreation Publishing, Oct 26, 2017 - 170 pages

This is a Non-fiction book authored by Ashish Kumar.

 

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Contents

तृतीय अध्याय अर्थ का स्वरूप
46
चतुर्थ अध्यायकाम का स्वरूप
73
पङचम अध्याय मोक्ष का स्वरूप
100
षष्ठ अध्याय उपसंहार
147
Copyright

Common terms and phrases

अपनी अपने अर्थात् आचार्य चाणक्य आत्मा आदि इन इन्द्रियों इस प्रकार ईश्वर उस उसके उसी प्रकार ऋग्वेद एक एवं कभी कर करके करता है करना चाहिए करने के कर्म कहते हैं कि का का अर्थ काम कामना कार्य किया किसी की कुछ के कारण के द्वारा के लिए के विषय में के समान को प्राप्त कोई भी क्योंकि गया है कि चाणक्य जब जाती जाते हैं जीवन जो ज्ञान तक तथा तप तो दान दिल्ली धन धर्म धर्म के नहीं ने पङचतन्त्र पर पुरुष पुरुषार्थ प्राप्त भारतीय संस्कृति भी मन मनुष्य को मानव मार्ग मोक्ष यदि यह यहाँ या ये रहता है रूप लिखते हैं कि लेकिन लेखक लेता है वर्णन वह वाराणसी वाला वाले विदुर विद्या वे वेद व्यक्ति शब्द शरीर शुक्राचार्य सकता है सत्य सदा सब सभी सुख से हितोपदेश ही हुआ है और है तथा हो जाता है होता है होती होते हैं होने

About the author (2017)

 Author of this book is Mr. Ashish Kumar.

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