Shri Ramcharit Manas (Ayodhyakand)

Front Cover
Lokbharti Prakashan, Jan 1, 2007 - 411 pages
 

What people are saying - Write a review

We haven't found any reviews in the usual places.

Other editions - View all

Common terms and phrases

अनेक अपनी अपने अब अर्थात् आदि आप इन्द्र इस प्रकार इसलिए उनके उस उसे एक ऐसा ओर कर करके करता करते कवितावली कहते हैं कि कहा कहीं का काम कामदेव काल किया किसी की कुछ के कारण के लिए के समान को कोई कौन क्या गया है गये जय जल जी के जैसे जो तक तथा तुलसी तुलसीदास तुलसीदास कहते तें तो था थे दिया देखकर नष्ट नहीं नहीं है नाम ने पर परन्तु प्राज्ञ बात बालि बीर ब्रह्मा भी मन मुझे में मेरे मैं यदि यह या रहे राजा राम रामचन्द्र जी रावण रूप रूपी लक्ष्मण लगे लिया लोग वह वाला विभीषण वे वेद शरीर शिव श्री संसार सकता है सब सभी समय साथ सीता सुग्रीव सुन्दर से सेवक सो सों स्वामी हनुमान हनुमान जी हाथ ही हुआ हुई हुए हूँ हे है और है कि है है हो गया होकर होता है होते होने

Bibliographic information