Kautilya Arthashastra

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Rajpal & Sons
 

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Contents

Section 1
3
Section 2
15
Section 3
19
Section 4
41
Section 5
72
Section 6
90
Section 7
105
Section 8
113
Section 9
128
Section 10
142
Section 11
155
Section 12
167

Common terms and phrases

अथवा अधिक अन्य अपनी अपने अमात्य अर्थशास्त्र आचार्य आदि इन इस इसी उचित है उत्पन्न उनके उन्हें उस उसका उसकी उसके उसपर उसे ऋण एक एवं और कर दे करके करता है करते करना करने करे कहते हैं का काम कारण कार्य किया किसी की की रक्षा के लिए के साथ को कोई कोष कौटिल्य क्योंकि गया हो चाहिए जब जा सकता है जाता है जाने जो तक तथा तरह तो दण्ड दिया जाए दुर्ग दे देता देना चाहिए देने देश दोनों द्वारा धन नहीं नाम ने पति पर परन्तु परस्पर पुत्र पुरुष प्रकार प्रजा प्रयोग प्राप्त भाग भी भूमि मत में यदि यह या युध्द योग्य रहे राजा के राज्य लाभ ले वह वा वाला वाले वे वेतन व्यय शत शत्रु सन्धि सब से सेना के स्थान ही हुआ हुई हुए है और है कि है है हैं हो तो हों होगा होता है होती होना चाहिए होने

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