Santa-kāvya kī sāmājika prāsaṅgikatā

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Vāṇī Prakāśana, 1994 - Hindi poetry - 168 pages
Study of the social relevance in the works of devotional Hindi poets of the Bhakti period, i.e. 1500-1800, in Hindi literature.

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Contents

भूमिका
13
3
43
वर्ण व्यवस्था के सन्दर्भ में प्रासंगिकता
131

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Common terms and phrases

अतः अधिक अनेक अपनी अपने अर्थ आज आदि आधार इन इस इसके इसी उनके उन्हें उन्होंने उस उसकी उसके उसे एक एवं ऐसी ओर कबीर कर करके करता है करते हैं करना करने कवि कवियों कहते कहा है का किन्तु किया है किसी कुछ के कारण के लिए केवल को कोई क्या क्योंकि गया है जनता जब जा सकता जाता है जाति जीवन जो तक तथा तरह तो था थी थे दिया दृष्टि से दो दोनों द्वारा धर्म धार्मिक नहीं है नाम निर्गुण ने पर पृ० प्रकार प्रासंगिकता बहुत बात भक्ति भारतीय भी मनुष्य मुसलमान यह या युग ये रहा राम रूप में रूप से वर्ग वह वही वाले विचार वे व्यक्ति व्यवस्था संत सकता है सन्त सन्तों सब सभी समय समाज की समाज में सम्बन्ध साथ सामाजिक साहित्य से स्थिति स्पष्ट हिन्दू ही ही नहीं हुआ हुए है और है कि है जो हो होता है होती होने

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