Manav Shareer--Rachna, Part 1

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Motilal Banarsidass Publishe
In 1956, Theravada Buddhists in Sri Lanka and throughout Southeast Asia celebrated the 2500th anniversary of the Buddha`s entry into Nirvana and of the establishment of the Buddhist tradition. This book examines this revival of Theravada Buddhism among the laity of Sri Lanka, analysing its origins and its growth up to the present-day. Within the spectrum of reinterpretations that have comprised the revival, the book focuses on four important types or patterns of reinterpretation and response. It examines the rational reformism of the early Protestant Buddhists led by Anagarika Dharmapala and the conservative neotraditionalism of the Jayanti period.
 

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