Pracheen Bharat Mein Rajneetik Vichar Evam Sansthayen

Front Cover
Rajkamal Prakashan, Sep 1, 2007 - 421 pages
0 Reviews
Reviews aren't verified, but Google checks for and removes fake content when it's identified
प्राचीन भारतीय इतिहास को वैज्ञानिक खोजों के आलोक में व्याख्यायित-विश्लेषित करनेवाले इतिहासकारों में प्रो. रामशरण शर्मा का महत्त्वपूर्ण स्थान है। अपनी इस पुस्तक में उन्होंने प्राचीन भारत की राजनीतिक विचारधाराओं और संस्थाओं के साम्राज्यवादी और राष्ट्रवादी स्वरूप का सर्वेक्षण किया है। इस क्रम में उन्होंने गण, सभा, समिति, परिषद-जैसी वैदिक संस्थाओं के जनजातीय स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए ‘विदथ’ नामक लोक-संस्था पर विस्तार से विचार किया है और उत्तर-वैदिक संस्थाओं के अध्ययन में वर्ण और धर्म का महत्त्व दिखाया है। उन्होंने यह भी बताया है कि सातवाहन राज्यव्यवस्था मौर्य और गुप्त व्यवस्थाओं तथा उत्तर और दक्षिण भारत को मिलानेवाली कड़ी का काम करती है। साथ ही, कुषाण तथा सातवाहन राज्यतंत्रों के विश्लेषण में बाह्य, स्थानीय और सामंतवादी तत्त्वों पर भी प्रो. शर्मा की दृष्टि गई है। कुल मिलाकर, प्रो. शर्मा ने वैदिक काल से लेकर गुप्त काल तक राज्यव्यवस्था के प्रमुख चरणों का बदलते हुए आर्थिक और सामाजिक संदर्भों में अध्ययन किया है। उपरोक्त अध्ययन के क्रम में प्रो. शर्मा ने कुछ महत्त्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं और उनका यथासंभव समाधान भी इस पुस्तक में दिया है। उनका मानना है कि इस काल में जिन राजनीतिक विचारों का जन्म हुआ, उनके पीछे जाति, वर्ण, धर्म और अर्थव्यवस्था की भूमिका को समझे बिना इन विचारों की तह तक पहुँचना संभव नहीं है। इस पुस्तक के प्रकाशन के पूर्व इन मुद्दों पर व्यापक रूप से विचार नहीं किया गया था। एम.ए. कक्षाओं के प्राचीन भारतीय इतिहास के छात्रों, शोधार्थियों और अध्यापकों के लिए यह एक आवश्यक ग्रंथ है।
 

What people are saying - Write a review

We haven't found any reviews in the usual places.

Selected pages

Contents

Section 1
5
Section 2
9
Section 3
10
Section 4
13
Section 5
15
Section 6
29
Section 7
47
Section 8
65
Section 16
194
Section 17
206
Section 18
227
Section 19
247
Section 20
268
Section 21
284
Section 22
303
Section 23
332

Section 9
78
Section 10
91
Section 11
109
Section 12
122
Section 13
156
Section 14
170
Section 15
179
Section 24
346
Section 25
354
Section 26
376
Section 27
380
Section 28
392
Section 29
404

Common terms and phrases

अथवा अधिक अधिकारी अनेक अन्य अपनी अपने अर्थ आधार इन इस इसका इसके इसमें इसलिए उत्तर उनके उसके ऋग्वेद एक एवं ऐसा ऐसे ऑफ और कर करता करते थे करना करने कहा गया का उल्लेख कारण काल में किंतु किए किया गया है किसी की कुछ के अनुसार के बीच के रूप में के लिए केवल को कोई कौटिल्य क्योंकि गए जनजातीय जा सकता है जाता था जो तक तथा तरह तो थी दि दिया दो दोनों द्वारा नहीं है ने पर पृ प्रकार प्रयोग प्राचीन प्राप्त बहुत बात बाद ब्राह्मण ब्राह्मणों भारत भूमि महत्त्वपूर्ण मिलता है में भी यद्यपि यह या ये राजनीतिक राजा के राज्य राज्य के लेकिन लोग लोगों वह वही विदथ विभिन्न वे वैदिक व्यवस्था शब्द शायद शासन सं संकेत संबंध सभा सभी समाज से स्थान स्पष्ट हम हमें ही हुआ है हुए हैं हो होगा होता था होता है कि होती होते होने

About the author (2007)

रामशरण शर्मा जन्म : 1 सितम्बर, 1920, बरौनी (बिहार)। शिक्षा : एम.ए., पी-एच.डी. (लंदन); आरा, भागलपुर और पटना के कॉलेजों में प्राध्यापन (1959 तक), पटना विश्वविद्यालय में इतिहास के विभागाध्यक्ष (1958-73), पटना विश्वविद्यालय में प्रोफेसर (1959), दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रोफेसर तथा विभागाध्यक्ष (1973-78), जवाहरलाल नेहरू फेलोशिप (1969), भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद् के अध्यक्ष (1972-77), भारतीय इतिहास कांग्रेस के सभापति (1975-76), यूनेस्को की इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर स्टडी ऑफ कल्चर्स ऑफ सेंट्रल एशिया के उपाध्यक्ष (1973-78), बंबई एशियाटिक सोसायटी के 1983 के कैंपवेल स्वर्णपदक से सम्मानित (नवम्बर, 1987), अनेक समितियों-आयोगों के सदस्य और भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद् के नेशनल फैलो और सोशल साइंस प्रोबिंग्स के संपादक मंडल के अध्यक्ष भी रहे। प्रमुख प्रकाशित पुस्तकें : विश्व इतिहास की भूमिका, आर्य एवं हड़प्पा संस्कृतियों की भिन्नता, भारतीय सामंतवाद, प्राचीन भारत में राजनीतिक विचार एवं संस्थाएँ, प्राचीन भारत में भौतिक प्रगति एवं सामाजिक संरचनाएँ, शूद्रों का प्राचीन इतिहास, भारत के प्राचीन नगरों का पतन, पूर्व मध्यकालीन भारत का सामंती समाज और संस्कृति। हिन्दी और अंग्रेजी के अतिरिक्त प्रो. शर्मा की पुस्तकें अनेक भारतीय भाषाओं और जापानी, फ्रांसीसी, जर्मन तथा रूसी आदि विदेशी भाषाओं में भी प्रकाशित हुई हैं। निधन : 20 अगस्त, 2011

Bibliographic information