Poorvottar Bharat Ka Janjatiya Sahitya

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Vani Prakashan, Mar 7, 2017 - Indic literature - 184 pages
Transcript of papers on the tribal literature and social life of tribes in northeastern India presented at a two days national seminar titled "Loka aura Śāstra: Janajātīya Sāhitya" organized by Department of Hindi, Tezpur University, and Sahitya Akademi, Delhi during 26-27 March, 2015 in Tezpur.
 

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Section 22
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अन्य अपनी अपने असम असम के असमिया आज आदि आदिवासी इन गीतों इस इस प्रकार इसके उत्सव उनके एक एवं और कर करती करते हैं करने कहा का किया जाता है किसी की कुछ के कारण के गीत के रूप में के लिए के लोग के साथ को गया है गीत गीतों में गुवाहाटी घर चाह जनजाति जनजाति के जनजातियों जनजातीय जा जाति जाती जाते हैं जीवन जो डॉ तक तथा तरह तिवा तो था दो द्वारा नहीं नहीं है नागालैंड नाम नृत्य ने पर परम्परा पूजा पृ प्राप्त बहुत बोडो भारत भाषा भाषाओं भी मणिपुर मिसिंग में प्रचलित में भी मेघालय यह यहाँ या ये रहा है राभा रूप से लोक लोक-साहित्य लोकगीत लोकगीतों में लोग लोगों के वह वाले विभिन्न वे शब्द संस्कृति सभी समय समाज में साहित्य से से सम्बन्धित स्थान हम हिन्दी ही हुए है और है कि हो होता है होती होते हैं होने

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