Sankhyakarika (Srimadiswarkrishnavirchit) Anvaya-Artha-Godpadhbhashya-Bhashyaanuvaad-Tipani-Vishadbhumikasahit

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Motilal Banarsidass Publishe, 2008 - 116 pages
Hindi-speaking indentured labourers and their progeny in South Africa; and
 

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Contents

Section 1
Section 2
Section 3
Section 4
Section 5
Section 6
Section 7
Section 8
Section 9
Section 10
Section 11

Common terms and phrases

अत अनुमान अपने अब अर्थ अर्थात् अहम आदि इति इन इस प्रकार इसलिए इसलिये इसी उत्पन्न उस उसका उसकी एक एव एवं ऐसा कपिल कर करता है करती करते हैं करने कहते कहा कहे का कारण कारिका कार्य किन्तु किया किसी की के लिए के लिये कैसे को कोई क्या क्योंकि गुण ग्रहण जब जाती जैसे जो ज्ञान तथा तब तमोगुण तीन तो दूसरे दोनों द्वारा नहीं नहीं होता ने पर पुरुष के प्रकार का प्रकृति प्रधान बुद्धि भवति भी भेद मन में मोक्ष यथा यह या ये रजोगुण रहता है रहते रूप वह विकृति विपर्यय विशेष विषय विषयों वृति वे व्यक्त शब्द शरीर संयोग सकता सत्व सब सर्ग सांख्य साथ सिद्ध सूक्ष्म सृष्टि से ही ही हुआ है और है कि है वह है है हो जाता है होगा होता है होती होते हैं होने पर होने से

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