Ekta Ki Brahmmurti Sardar Vallabhbhai Patel

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Prabhat Prakashan - 255 pages
सरदार वल्लभभाई पटेल को पहले से जानता था। जब वह भारतीय संविधान परिषद् के सदस्य थे तो मेरा उनसे परिचय बढ़ गया। वहाँ दिए हुए उनके भाषणों को मुझे अच्छी तरह स्मरण है। उनकी वाणी राष्ट्र की आवाज होती थी, जिसके संबंध में न तो कोई अशुद्धि कर सकता था और न भ्रांति हो सकती थी।

जब वह बंबई के बिड़ला भवन में स्वास्थ्य लाभ कर रहे थे तो मुझे स्मरण है कि मैं सोवियत संघ जाते समय उनसे विदा लेने गया था। उन्होंने मुझे चेतावनी दी थी कि यह कार्य बड़े-बड़े प्रसिद्ध व्यक्तियों को असफलता दे चुका है, किंतु साथ ही उन्होंने यह भी कहा, ‘‘जहाँ अन्य व्यक्ति असफल हो चुके हैं, वहाँ आप सफल होंगे।’’ वास्तव में सरदार के उक्त शब्द मास्को में मेरे राजदूत काल भर मेरी स्मृति में रहे। मैं आपको यह बतला रहा हूँ कि वह किस प्रकार परिस्थिति के निर्णायक, भावी रूप के विधाता तथा सुदूर भविष्य को ठीक-ठीक देख लेने की क्षमता रखते थे। जब तक वर्तमान भारत जीवित है, उनका नाम वर्तमान भारत के ऐसे राष्ट्र-निर्माता के रूप में सदा स्मरण किया जाता रहेगा, जिन्होंने 600 भारतीय देशी राज्यों का एकमात्र संघ बनाया। उनका यह कार्य हमारे देश के एकीकरण की दिशा में अत्यधिक स्थायी कार्य था। इस विषय में उनके कार्य को हम कभी नहीं भूल सकते। जैसा कि मैंने कहा है, जब तक भारत जीवित है, वर्तमान भारत के निर्माता के रूप में उनका नाम सदा स्मरण किया जाता रहेगा।

—आचार्य चंद्रशेखर शास्त्री की पुस्तक ‘राष्ट्रनिर्माता सरदार पटेल’ से

 

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Contents

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Section 5
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Section 7
Section 8
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Section 18
Section 19
Section 20
Section 21
Section 22
Section 23
Section 24

Section 9
Section 10
Section 11
Section 12
Section 13
Section 14
Section 15
Section 16
Section 25
Section 26
Section 27
Section 28
Section 29
Section 30
Section 31
Section 32

Common terms and phrases

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About the author

जन्म : 1 जून, 1938 मुलतान (पश्चिमी पंजाब, अब पाकिस्तान में)। शिक्षा : एम.ए. हिंदी, पी-एच.डी.। हिंदी के विख्यात कवि, आलोचक, नाटककार, पत्रकार, संपादक। कबीर, दादू, मलूक, मीरां आदि संतों पर कुल 180 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित। चार नाटक, दो संस्मरण भी प्रकाशित। ‘साहित्य भूषण पुरस्कार’ (उत्तर प्रदेश 2003); ‘ज.गु. रामानंद सम्मान’ (2013); ‘शिरोमणि साहित्यकार सम्मान’ (पंजाब सरकार 2004); ‘कबीर शिखर सम्मान’, ‘संत मलूकरत्न सम्मान’, ‘संत दादू शिखर सम्मान’ आदि प्राप्त। विश्व रामायण सम्मेलन बेल्जियम (1989) में अध्यक्ष मंडल के सदस्य, मॉरीशस, इंगलैंड, हॉलैंड, नेपाल में तथा देश में कबीर चेतना यात्राएँ। विश्व कबीरपंथी महासभा के अध्यक्ष, अखिल भारतीय श्री दादू सेवक समाज के पूर्व महानिदेशक, संत साहित्य अकादमी के अध्यक्ष। दिल्ली विश्वविद्यालय के श्री अरविंद महाविद्यालय (सांध्य) से अवकाशप्राप्त रीडर।

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