Bade Saheb

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Educreation Publishing, Apr 5, 2017 - Self-Help - 156 pages

It is a book based on true incident with invisible people around us 

 

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Contents

Section 1
11
Section 2
17
Section 3
30
Section 4
42
Section 5
46
Section 6
53
Section 7
61
Section 8
80
Section 9
91
Section 10
95
Section 11
99
Section 12
104
Section 13
140
Section 14
147
Copyright

Common terms and phrases

अगला अपना अपने अब अभी आए आप आपको आसनसोल इस उनका उनके उन्हें उन्होंने उस उसे एक और करने कल कलकत्ता कह कर कागज काम कि किया किसी की कुछ के बाद के लिए के साथ को कोई क्या खाना गाड़ी ग्यास घर चले गए चाय जब जब्बार साहब ने जब्बार साहब बोले जाने जी जो ठीक है तक तुम तो था थी थे दिया दिल्ली दीजिए दूंगा दूसरे दिन दे देर दो नही नहीं नहीं है ने कहा नौकरी पटना पर पास पेपर पैसा फिर फोन बजे बड़े साहब बड़े साहब ने बड़े साहब बोले बता बहुत बात बी के सिंह बोल बोला भाई भी मुजफ्फरपुर मुझे में मेरा मेरी मेरे मैं मैंने कहा मैंने पूछा यह यहाँ ये रख रहा था रहे थे रहे हैं रात लगा लिया ले लोग वह वहाँ वाले वे वो सब से से बात हम हाँ हावड़ा ही हुआ हूं हो गया होगा

About the author (2017)

M. Tasleem is a retired General Manager from Coal India who also happens to be a law graduate. He hails from a small town called Supaul in Bihar, which lies on the border of Nepal. He believes that life is a beautiful gift wherein all the experiences we encounter make it ever more beautiful and astounding. This process of learning something new each day has inspired him to write.  Quad Lamhe, Ek Aurat, Frozen Moments and Pretty Woman are his earlier books.

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