जो इतिहास में नहीं है

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Bhāratīya Jānapīṭha, 2005 - Jharkhand (India) - 488 pages
Based on the exploitation of adivasis of Jharkhand by the Britishers of the East India Company; covers the pre 1857 period.

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अंग्रेजी अपना अपनी अपने अब अभी आग आगे आदिवासियों आदिवासी इस उठा एक और कम्पनी सरकार कर करते करने का काहे कि किया किसी की ओर की भाँति कुछ के बाद के भीतर के लिए के साथ कोई कौन खेत गया था गये गाँव घर चुका जंगल में जब जा जाता जो ठाकुर तक तीर तू तो था कि थीं दिन दिया दिया था दे देह दो नई नईं नहीं नहीं था ने कहा ने पूछा पर परन्तु पानी पीछे फिर बाघामुण्डी बात बाहर बोला भाई भी मन महाजन माँझी मानो यह या रहा था रही थी रहे थे राज राजा गोमके रात रे लगा लगा था लगी लगे लड़ाकों लाली लिया ले लोग वह वाले शंख सन्ताल सन्तालों सिंह सिदो ने सिदो मुरमू से सो हम हमें हर हाथ हारिल ने हारिल मुरमू को ही हुआ हुए हूल है है रे हैं हो होगा होता होने

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