Urdu Hindi Kosh

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Lokbharti Prakashan, Jan 1, 2012 - Urdu language - 440 pages
उर्दू और हिन्दी दोनों भाषाओं के प्रामाणिक ज्ञान और उन्हें निकट लाने में यह कोश अत्यन्त सहायक है। उर्दू भाषी पाठक और प्रेमी प्रायः ऐसे शब्दकोश की जरूरत महसूस करते हैं जो हो तो उर्दू की लिपि में किन्तु जिससे हिन्दी शब्दों का अर्थज्ञान हो सके। इसी प्रकार उर्दू से अनभिज्ञ हिन्दीभाषी नागरी लिपि में उर्दू शब्दों की प्रस्तुति से प्रसन्नता का अनुभव करते हैं। इस दिशा में यह उर्दू-हिन्दी कोश एक महत्त्वपूर्ण प्रयास है। यह कोश उर्दू भाषा में प्रयुक्त होनेवाले अरबी-फारसी आदि के शब्दों का हिन्दी अर्थ जानने में पर्याप्त सहायक है। अरबी, फारसी व तुर्की आदि की अधिकांश संज्ञाओं और विशेषणों के समावेश ने इस कोश की सार्थकता बढ़ा दी है। कोश की विश्वसनीयता फारसी लिपि में मुख्य प्रविष्टियों के अंकन के कारण बढ़ गई है। भाषाविदों, साहित्य-साधकों, शिक्षकों, विद्यार्थियों, अनुवादकों, सम्पादकों, शोधार्थियों आदि के लिए यह कोश बहुत उपयोगी है।

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About the author (2012)

जन्म: 16 सितम्बर, 1932 को, अकालगढ़, जिला - गुजराँवाला में (अब पाकिस्तान)। शिक्षा: एम.ए., पी-एच.डी.। डॉ. बदरीनाथ कपूर पिछले पाँच दशकों से भाषा, व्याकरण और कोश प्रणयन के क्षेत्र में निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. कपूर 1956 से 1965 तक हिंदी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग द्वारा प्रकाशित ‘मानक हिंदी कोश’ पर सहायक सम्पादक के रूप में काम करते रहे। बाद में जापान सरकार के आमंत्रण पर टोक्यो विश्वविद्यालय में, 1983 से 1986 तक, अतिथि प्रोफेसर के रूप में सेवा प्रदान की। प्रकाशन: प्रभात बृहत् अंग्रेजी-हिंदी कोश, प्रभात व्यावहारिक अंग्रेजी-हिंदी कोश, प्रभात व्यावहारिक हिंदी-अंग्रेजी कोश, प्रभात विद्यार्थी हिंदी-अंग्रेजी कोश, प्रभात विद्यार्थी अंग्रेजी-हिंदी कोश, बेसिक हिंदी, हिंदी पर्यायों का भाषागत अध्ययन, वैज्ञानिक परिभाषा कोश, आजकल की हिंदी, अंग्रेजी-हिंदी पर्यायवाची कोश, शब्द-परिवार कोश, हिंदी अक्षरी, लोकभारती मुहावरा कोश, परिष्कृत हिंदी व्याकरण, सहज हिंदी व्याकरण, नूतन पर्यायवाची कोश, लिपि वर्तनी और भाषा, हिंदी व्याकरण की सरल पद्धति, आधुनिक हिंदी प्रयोग कोश, बृहत् अंग्रेजी-हिंदी कोश, व्यावहारिक अंग्रेजी-हिंदी कोश, मुहावरा तथा लोकोक्ति कोश, व्याकरण- मंजूषा, हिंदी प्रयोग कोश आदि। अलंकरण एवं सम्मान: डॉ. कपूर की अनेक पुस्तकें उत्तर प्रदेश शासन द्वारा पुरस्कृत हैं। ‘श्री अन्नपूर्णानन्द वर्मा अलंकरण’ 1997, ‘सौहार्द सम्मान’ 1997, ‘काशी रत्न’ 1998, ‘महामना मदनमोहन मालवीय सम्मान’ 1999 एवं ‘विद्या भूषण सम्मान’ 2000 । आवरण: राजकमल स्टूडियो

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