Bhartiya Kavyashastra Ki BhumikaLokbharti Prakashan |
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अनुसार अपनी अपने अभिनवगुप्त अर्थ अर्थात् अलंकार आचार्य आदि आधार आनन्द आलोचक आस्वादन इन इस प्रकार इसके इसी इसे उसका उसकी उसके एक एवं औचित्य कर करके करता है करते हुए करते हैं करने कर्म कला कलात्मक कवि कवि के कविता के कहते कहा का कालिदास काव्य काव्य के काव्यशास्त्र किन्तु किया है की के अन्तर्गत के बाद के रूप में के लिए के साथ केवल को गया है चर्चा चित्त चिन्तन जा जाता है जीवन जैसे जो ज्ञान तक तत्त्व तथा तो था दृष्टि दोनों द्वारा नहीं नहीं है नाम ने पर परम्परा पश्चिमी पाठक प्रतिभा प्रयोग प्रश्न भक्ति भरत भारत भारतीय कविता भारतीय साहित्य भाव भाषा भी मन्तव्य महाभारत मूल मूल्यों यह यहाँ यही या ये रस राम लोक वर्णन वह वाल्मीकि रामायण विषय शती शब्द शब्दार्थ संस्कृत सन्दर्भ में सम्पूर्ण सर्जक सामाजिक सिद्धान्त से से सम्बद्ध स्वरूप ही हुआ है और है कि हो होता है


