Bhāratīya bhāshāvij˝āna

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Vāṇī Prakāśana, 1994 - Comparative linguistics - 222 pages

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अपनी अपने अर्थ में अवधी आगे आज आदि में इन इस इसी तरह इसीलिए उस उसी एक कर करके कहते हैं कहा कहीं का का लोप का विकास काम कारण किया किसी की जगह की भाषा कुछ के लिए को कोई क्या क्रिया खड़ी बोली गई गए गया है चलता है चीज जब जा जाती जैसे जो तक तथा तब तो था थी थे दिया दो दोनों धातु नहीं है नाम ने पंजाबी पर परन्तु पहले पांचाली प्रत्यय प्रयोग प्राकृत फिर बन बना बहुत बहुवचन बात भाषा भाषा का भाषा में भाषाएँ भाषाओं भेद मूल में भी यदि यह यहाँ यही या यानी ये राजस्थानी राम लिया लोग वर्ग वर्ण वह वहाँ विभक्ति वे व्रजभाषा शब्द शब्दों संस्कृत में सब समय सर्वत्र साहित्य साहित्यिक से सो स्प स्पष्ट हम हिन्दी में ही ही है हुआ है और है कि हैं हो गया होगा होता है होते

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