Kundalini Yoga Tattva

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Motilal Banarsidass Publishe
The present volume selcts twenty-four of Prof. Wayman`s published research papers around the topic of Buddhist Insight, and includes only strong, well developed papers consistent with the topic. Students of Buddhism and general Indian religion will find here a rich offering of genuine research with the best of sources and Wayman`s own thoughtful presentations and original organization of the information. The papers begin with Buddha as Savior among the latest and end with the earliest in this volume, Twenty one Praises of Tara.The Hindu and Buddhist Studies illustrate Wayman`s comparative approach by showing both sides in their strong independence, and sensitively revealing their relation.
 

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nice book

Contents

Section 1
Section 2
Section 3
Section 4
Section 5
Section 6

Common terms and phrases

० ० १ ० अ० अथवा अध्याय अपने आत्मा आदि आसन इत्यादि इन इस इसका इसी ईश्वर उ० उपर्युक्त उसके उसी ऊपर ऋग्वेद एक कर करना करने कहते हैं कहा है का किया की कुछ कुण्डलिनी योग के केवल को क्रिया गया है गुण चक्र चार जब जाता है जो कि ज्ञान तक तत्त्व तथा तन्त्र तरह तूक्ष्य तो दोनों द्वारा ध्यान नहीं नाडी नाम नीचे ने पतञ्जलि पर परम परा पुराण पृथ्वी प्रकार की प्रत्याहार प्राण प्राणायाम प्राप्त ब्रा० भी मं० मण्डल मनुष्य मुक्ति मुख्य मुद्रा में में है मैं मोक्ष यजुर्वेद यथा यह या ये योग योगी रूप लय योग लिङ्ग वायु विज्ञान वेद वेदों शक्ति शरीर शिव संसार संहिता सकता है सब समय समाधि साथ साधक साधना सिद्ध से स्कूल स्थान हमारे ही हुआ हुई है और है कि हो होकर होता है होती होने

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